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Tuesday, September 22, 2026

‘बदनाम करने की इजाजत नहीं’ — NCERT किताब पर CJI सख्त

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सुप्रीम कोर्ट ने एनसीईआरटी की कक्षा आठ की सामाजिक विज्ञान की किताब में न्यायपालिका से जुड़ी सामग्री पर गंभीर आपत्ति जताई है। प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि वह किसी को भी न्यायपालिका की संस्था को बदनाम करने की इजाजत नहीं देंगे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कानून अपना काम करेगा और जरूरत पड़ी तो अदालत स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करेगी। वहीं, जस्टिस बागची ने इसे बुनियादी ढांचे के खिलाफ बताया।मामला उस पाठ से जुड़ा है जिसमें न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से संबंधित एक हिस्सा जोड़ा गया है। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने इस मुद्दे को अदालत के सामने उठाया। उन्होंने कहा कि स्कूल के बच्चों को इस तरह की सामग्री पढ़ाया जाना चिंताजनक है। इस पर सीजेआई ने कहा कि उन्हें इस विषय पर कई फोन और संदेश मिले हैं और वह पूरी तरह से मामले से अवगत हैं।

सीजेआई ने जताई नाराजगी

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि मैं इस संस्था को बदनाम करने की अनुमति नहीं दूंगा। मुझे पता है कि इससे कैसे निपटना है।” उन्होंने संकेत दिया कि यह एक सुनियोजित और सोची-समझी कोशिश लगती है। उन्होंने कहा कि वह इस पर अभी ज्यादा टिप्पणी नहीं करना चाहते, लेकिन उचित कदम उठाए जाएंगे।

 वरिष्ठ वकीलों ने उठाया मुद्दा

कपिल सिब्बल ने अदालत से स्वतः संज्ञान लेने की अपील की। अभिषेक मनु सिंघवी ने भी कहा कि ऐसी सामग्री छात्रों के मन में न्यायपालिका को लेकर गलत संदेश दे सकती है। सीजेआई ने दोनों वरिष्ठ वकीलों का धन्यवाद किया कि उन्होंने इस विषय को अदालत के संज्ञान में लाया।

क्या है विवाद का मूल कारण

एनसीईआरटी की कक्षा आठ की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक के एक अध्याय में “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार” शीर्षक से सामग्री जोड़ी गई है। इसी हिस्से को लेकर विवाद खड़ा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे को गंभीरता से लिया गया है। अदालत ने भरोसा दिलाया कि उचित और कानूनी कदम उठाए जाएंगे। सीजेआई ने कहा कि न्यायपालिका की गरिमा और विश्वसनीयता को बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
 

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