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Tuesday, September 22, 2026

केंद्र सरकार ने 11 साल बाद बढ़ाई सरकारी वकीलों की फीस, मंत्रालय जारी कर चुका है अधिसूचना   

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने अदालतों में सरकार की ओर से पैरवी करने वाले वकीलों को बड़ी राहत देते हुए उनकी फीस में बढ़ोतरी कर दी है। लगभग 11 साल बाद यह संशोधन किया गया है। केंद्रीय कानून मंत्रालय ने 5 फरवरी को इस संबंध में अधिसूचना भी जारी कर दी है, जिसके तहत विभिन्न श्रेणियों के सरकारी वकीलों को अब पहले की तुलना में काफी अधिक पारिश्रमिक मिलेगा। 
अधिसूचना के अनुसार, नियमित अपील और अंतिम सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से पेश होने वाले ‘ए’ श्रेणी के वकीलों को अब प्रति मामले में प्रति दिन 21,600 रुपये का भुगतान किया जाएगा। वहीं ‘बी’ और ‘सी’ श्रेणी के वकीलों को 14,400 रुपये प्रति दिन मिलेंगे। इससे पहले ‘ए’ श्रेणी के वकीलों को 13,500 रुपये और ‘बी’ व ‘सी’ श्रेणी के वकीलों को 9,000 रुपये प्रति दिन फीस मिलती थी। सरकारी वकीलों की फीस में यह संशोधन अक्टूबर 2015 के बाद पहली बार किया गया है। कानून मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह बढ़ोतरी केवल नियमित अपील और अंतिम सुनवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य प्रकार के मामलों, विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों के साथ बैठकों (कॉन्फ्रेंस) और सलाह-मशविरा करने की फीस में भी संशोधन किया गया है। इसके अलावा, दिल्ली और राज्यों की राजधानियों में पेश होने वाले वकीलों की फीस में भी बढ़ोतरी की गई है। 
कानून मंत्रालय से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है, कि महंगाई, कानूनी पेशे से जुड़े बढ़ते खर्च और योग्य पेशेवरों को बनाए रखने की जरूरत को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। अधिकारी के अनुसार, लंबे समय से सरकारी वकीलों की ओर से फीस बढ़ाने की मांग की जा रही थी, जिसे अब पूरा किया गया है। 
पूर्व केंद्रीय विधि सचिव और वर्तमान में विधि आयोग की सदस्य सचिव अंजू राठी राणा ने इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट करते हुए कहा, कि केंद्र सरकार के वकीलों के लिए फीस संशोधन की अधिसूचना अब लागू हो गई है। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान इस संबंध में निर्णय लिया गया था और यह एक दशक से अधिक समय से लंबित मामला था। उन्होंने कहा कि अदालतों में केंद्र सरकार का प्रभावी प्रतिनिधित्व करने के लिए योग्य और प्रतिभाशाली वकीलों को बनाए रखना जरूरी है, और यह फीस वृद्धि उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस फैसले से देशभर में सरकारी वकीलों में संतोष और उत्साह का माहौल है। 

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