11.7 C
Munich
Monday, March 23, 2026

मॉं सरस्वती के भारत में हैं पांच प्राचीन और भव्य मंदिर, क्या कभी आप भी गए हैं यहां  

Must read


नई दिल्ली। बसंत पंचमी ही नहीं अनेक शुभ अवसरों पर लोग अपने घरों और मंदिरों में मां सरस्वती की पूजा-अर्चना करते हैं। ऐसे में आपके लिए यह जानना बेहद जरुरी हो जाता है कि भारत में मां सरस्वती के कुछ प्राचीन और भव्य मंदिर भी हैं, जहां आप साल में कभी भी दर्शन कर सकते हैं। ऐसे ही प्रमुख मंदिरों में राजस्थान के पुष्कर में स्थित है सावित्री देवी मंदिर। इसके अलावा सरस्वती मंदिर, राजस्थान (शारदा पीठ), माता सरस्वती मंदिर, उत्तराखंड, कूथनूर महा सरस्वती मंदिर, तमिलनाडु और कर्नाटक का श्री शारदाम्बा मंदिर प्रमुख हैं।  

माता सरस्वती मंदिर, उत्तराखंड
उत्तराखंड के बद्रीनाथ से केवल 3 किलोमीटर दूर, माणा गांव के पास मौजूद यह मंदिर वेदों और शास्त्रों में विशेष महत्व रखता है। धार्मिक मान्यता है कि यह स्थान देवी सरस्वती का जन्मस्थान है। यहां सरस्वती नदी एक धारा के रूप में प्रकट होती है, इस कलकल धारा कहा जाता है। बताया जाता हैं कि यह धारा एक मुख के समान दिखाई देती है, जो देवी के दिव्य मूल का प्रतीक है। किंवदंतियों के अनुसार, इसी स्थान पर महर्षि वेद व्यास ने महाभारत की रचना की थी और पांडवों ने अपनी स्वर्ग यात्रा के दौरान यहां का दौरा किया था। यहां पास में ही भीम शिला नामक एक अनोखी चट्टान भी मौजूद है।

सरस्वती मंदिर, राजस्थान (शारदा पीठ)
सफेद संगमरमर से बना शानदार मंदिर 1959 में बनाया गया था। यह 20वीं सदी की वास्तुकला और इंडो-आर्यन नागर शैली का एक बेहतरीन उदाहरण है। मकराना मार्बल से बना यह मंदिर 70 खंभों पर टिका है और इसका क्षेत्रफल लगभग 25,000 वर्ग फीट है। इस मंदिर का शिखर 110 फीट ऊंचा है, इस पर सोने की परत चढ़े तांबे के कलश लगे हैं। इसकी बनावट कुछ ऐसी है कि यह बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (बीटस) के क्लॉक टॉवर की सीध में है, जहां ज्ञान की देवी और जी.डी. बिड़ला की प्रतिमा एक दूसरे के आमने-सामने दिखाती हैं।

सावित्री देवी मंदिर, पुष्कर (राजस्थान)
राजस्थान के अजमेर जिले के पुष्कर में रत्नागिरी पहाड़ी की चोटी पर मौजूद सावित्री देवी मंदिर देश के सबसे प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है। करीब 750 फीट की ऊंचाई पर बना यह मंदिर भगवान ब्रह्मा की पत्नियों सावित्री और गायत्री को समर्पित है। इस मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को करीब 970 सीढ़ियां चढ़नी होती हैं। यहां से पुष्कर झील का मनमोहक दृश्य दिखाता है। इस मंदिर के अंदर तीन मूर्तियां विराजमान हैं। 

कूथनूर महा सरस्वती मंदिर, तमिलनाडु
तमिलनाडु का कूथनूर मंदिर, इस पहले अंबलपुरी के नाम से जाना जाता था, मां सरस्वती को समर्पित एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। लोक कथाओं के अनुसार, भगवान ब्रह्मा और सरस्वती के बीच विवाद के कारण उन्हें पृथ्वी पर भाई-बहन के रूप में जन्म लेना पड़ा था। बाद में भगवान शिव ने सरस्वती को गंगा नदी में मिला दिया, जो अब यहां अरसलार नदी के रूप में बहती है। राजा राज चोल ने यह भूमि कवि ओट्टक्कूथन को दान में दी थी, जिसके बाद इस गांव का नाम कूथनूर पड़ा। यहां देवी दुर्गा को गांव की रक्षक देवी के रूप में पूजा जाता है।

श्री शारदाम्बा मंदिर, कर्नाटक
दक्षिण के राज्य कर्नाटक के शृंगेरी में स्थित प्राचीन मंदिर की स्थापना 8वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य जी ने की थी। शुरुआत में यहां चंदन की लकड़ी से बनी शारदाम्बा (सरस्वती) की एक खड़ी प्रतिमा थी। बाद में, 14वीं शताब्दी के दौरान विजयनगर के शासकों और 12वें जगद्गुरु श्री विद्यारण्य ने लकड़ी की मूर्ति की जगह सोने की बैठी हुई प्रतिमा स्थापित की। यह मंदिर दक्षिण भारत में विद्या की देवी का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है।

- Advertisement -spot_img

More articles

- Advertisement -spot_img

Latest article